Waseem Barelvi Shayari
"कल एक गाँव की बुढ़िया मेरी कार से जब टकराई..
बोली तोहरा दोष नहीं है हम ही को दिखत नही..”
~वसीम बरेलवी
"अगर मैं ये कहूं मैंने नए रस्ते निकाले है..
तो वह कहता उसके सारे मंज़र देखे -भाले है"
~वसीम बरेलवी
"वसीम अपनी समझ में तो बस इतनी बात आयी है..
जो टूटे दिल संभाले है वही अल्लाह वाले है"
~वसीम बरेलवी
"उसने क्या लाज रखी है मेरी गुमराही की..
की मैं भटकूं तो भटक कर भी उसी तक पहुँचू"
~वसीम बरेलवी
"चलते चलते राह में तुमसे अलग हो जाए हम..
कौन जाने कब तुम्हारी दुखती रग हो जाए हम"
~वसीम बरेलवी
"जवाँ नज़रो पे कब ऊँगली उठाना भूल जाते है..
पुराने लोग है अपना ज़माना भूल जाते है"
~वसीम बरेलवी
कोई टूटी सी कश्ती ही बगावत पर उतर आये
तो कुछ दिन को ये तूफ़ान सर उठाना भूल जाते है
~वसीम बरेलवी
"जिन्हे आपस में टकराने से ही फुर्सत नहीं मिलती..
उन्ही शाखों के पत्ते लहलहाना भूल जाते है"
~वसीम बरेलवी
"आते है आने दो ये तूफ़ान क्या ले जाएंगे..
मैं तो जब डरता के मेरा हौसला ले जाएंगे"
~वसीम बरेलवी
"जिस ज़मीन पर मैं खड़ा हूँ वो मेरी पहचान है..
आप आँधी है तो क्या मुझको उड़ा ले जाएंगे"
~वसीम बरेलवी
"आप बस किरदार है अपनी हदें पहचानिये..
वर्ना फिर एक दिन कहानी से निकाले जाएंगे"
~वसीम बरेलवी
"बिछड़ जाऊं तो फिर रिश्ता तेरी यादों से जोड़ूंगा..
मुझे ज़िद है मैं जीने कोई मौका न छोडूंगा"
~वसीम बरेलवी
"मोहब्बत में तलब कैसी वफादारी की शर्तें क्या..
वो मेरा हो न हो मैं तो उसी का हो के छोडूंगा"
~वसीम बरेलवी
"ताल्लुक टूट जाने पर जो मुश्किल में तुझे डाले..
मैं अपनी आँख में ऐसा कोई आंसू न छोडूंगा"
~वसीम बरेलवी
"लगता तो बेखबर सा हूँ लेकिन खबर में हूँ..
तेरी नज़र में हूँ तो फिर मैं सब की नज़र में हूँ"
~वसीम बरेलवी
"तुम्हारा साथ भी छूटा तुम अजनबी भी हुए..
मगर ज़माना तुम्हे अब भी मुझमे ढूंढ़ता है"
~वसीम बरेलवी
"रात-भर शहर की दीवारों पे गिरती रही ओस..
और सूरज को समंदर से ही फुर्सत नहीं"
~वसीम बरेलवी
"कौन सी बात कहाँ कैसे कही जाती है..
ये सलीका हो तो हर बात सुनी जाती है"
~वसीम बरेलवी
"एक बिगड़ी हुई औलाद भला क्या जाने..
कैसे माँ -बाप के होठों से हसी जाती है"
~वसीम बरेलवी
"खुद को मनवाने का मुझको भी हुनर आता हूँ..
मैं वो क़तरा हूँ के समंदर मेरे घर आता है"
~वसीम बरेलवी
"तुम्हारे हुस्न की तफ़सील कौन बतलाये..
जो देखता है वो आँखों में डूब जाता है"
~वसीम बरेलवी
"मैं बोलता गया हूँ वो सुनता रहा खामोश..
ऐसे भी मेरी हार हुई है कभी-कभी"
~वसीम बरेलवी
"उतरना आसमानो से तो कुछ मुश्किल नहीं लेकिन
ज़मीन वाले ज़मीन पर फिर मुझे चलने नहीं देंगे.."
~वसीम बरेलवी
"उसूलों पर जहां आंच आये तो टकराना जरुरी है
जो ज़िंदा हो तो फिर ज़िंदा नज़र आना जरुरी है"
~वसीम बरेलवी
"ये है तो सबके लिए हो ये ज़िद हमारी है..
इस एक बात पे दुनिया से जंग जारी है"
~वसीम बरेलवी
"मैं क़तरा हो के भी तूफ़ान से जंग लेता हूँ..
मुझे बचाना समंदर की ज़िम्मेदारी है"
~वसीम बरेलवी
"दुआ करों के सलामत रहे मेरी हिम्मत..
ये एक चराग कई आँधियों पे भारी है"
~वसीम बरेलवी