Kunwar Mahender Singh Bedi 'Sehar' Shayari
"इश्क़ हो जाए किसी से कोई चारा तो नहीं..
सिर्फ मुस्लिम का मोहम्मद पे इजारा तो नहीं"
-कँवर महेन्दर सिंह बेदी 'सहर'
"तू तो हर दीन के हर दौर के इंसान का है..
कम कभी भी तेरी तौकीर ना होने देंगे..
हम सलामत है ज़माने में तो इंशा-अल्लाह..
तुझको एक कौम की जागीर ना होने देंगे.."
-कँवर महेन्दर सिंह बेदी 'सहर'
"शेख जी बातें करें क़ुरान की.. रेहमान की..
और पंडित दास्ताँ छेड़ा करें भगवान की..
साहिब-ऐ-इमां नुमाइश क्यों करें ईमान की..
आओं हम इंसान है बातें करें इंसान की..
-कँवर महेन्दर सिंह बेदी 'सहर'
"दोस्त दुश्मन सबसे बेगाना बना देती है जंग..
मुल्क है क्या चीज़ तेहज़ीबें मिटा देती है जंग"
-कँवर महेन्दर सिंह बेदी 'सहर'