Masoom Ghaziabadi Shayari

मासूम गाज़ियाबादी शायरी

 




"तू मुफ़लिस की मशक्कत को ही सजदा मान ले मालिक..

मैं हाथों ही पे माथे की निशानी ले के आया हूँ "

-मासूम गाज़ियाबादी

 

" जो कलियों से ही नादानी करेंगे..

चमन की क्या निगेहबानी करेंगे..

मैं मज़लूमों के दामन सी रहा हूँ..

वो मुझपे ख़ाक सुल्तानी करेंगे "

-मासूम गाज़ियाबादी


"चेहरे तो कई तुझसे हसीन ढूंढ लाऊंगा..

किरदार कैसे लाऊंगा तेरी मिसाल के "

-मासूम गाज़ियाबादी

 


"तुम्हारी शख्सियत से ये सबक लेंगी नई नस्लें..

वही मंज़िल पे पहुंचा है जो अपने पाँव चलता है..

डुबो देता है कोई नाम अपने खानदानो के ..

किसी के नाम से मशहूर हो के गाँव चलता है "

-मासूम गाज़ियाबादी

 



"अगर गुस्से में हो बच्चे..तो खुश करके सुला देना

चरागों को कई नादान जलता छोड़ देते है "

-मासूम गाज़ियाबादी

 


 

"परिंदो जैसा दिल जब से खुदारा कर लिया मैंने..

अना से.. भूख से.. खुद ही किनारा कर लिया मैंने..

ना जब देखा गया सैयाद का उतरा हुआ चेहरा..

उतरना एक दाने पे गवारा कर लिया मैंने "

-मासूम गाज़ियाबादी

 


"जो सीखा है किसी मासूम को दे दो तो अच्छा है..

सिरहाने कब्र के रोया करेंगी वर्ना फ़नकारी "

-मासूम गाज़ियाबादी

 


"दुश्मन की भी बेटी की इज़्ज़त पे जो बात आए..

अफ़वाह नहीं हमदम सच को भी दबा देना "

-मासूम गाज़ियाबादी

 


"वो दीवाना सही सर को मगर लय में पटकता है..

यक़ीन अब होता जाता है की पत्थर टूट जाएगा "

-मासूम गाज़ियाबादी