Krishan Bihari 'Noor' Shayari
"किस तरह से देखूं भी बातें भी करूँ तुझसे..
आँख अपना मज़ा चाहे दिल अपना मज़ा चाहे"
-कृष्ण बिहारी 'नूर'
"मैं तो ग़ज़ल सुना के अकेला खड़ा रहा..
सब अपने-अपने चाहने वालों में खो गए"
-कृष्ण बिहारी 'नूर'
"गम मेरे साथ-साथ बहुत दूर तक गए..
मुझमे थकन ना पाई तो बेचारे थक गए"
-कृष्ण बिहारी 'नूर'
"दरियां में यूँ तो होते है कतरे ही कतरे सब..
क़तरा वही है जिसमें की दरियां दिखाई दे"
-कृष्ण बिहारी 'नूर'
"क्या हुस्न है जमाल है क्या रंग-रूप है..
वो भीड़ में भी जाए तो तनहा दिखाई दे"
-कृष्ण बिहारी 'नूर'
"ज़िन्दगी से बड़ी सज़ा ही नहीं..
और क्या जुल्म है पता ही नहीं"
-कृष्ण बिहारी 'नूर'
"इतने हिस्सों में बट गया हूँ मैं..
मेरे हिस्से में कुछ बचा ही नहीं"
-कृष्ण बिहारी 'नूर'
“ज़िन्दगी मौत तेरी मंज़िल है..
दूसरा कोई रास्ता ही नहीं"
-कृष्ण बिहारी 'नूर'
जिसके कारण फ़साद होते है
उसका कोई अता-पता ही नहीं
-कृष्ण बिहारी 'नूर'
"सच घटे या बढे तो सच ना रहे..
झूठ की कोई इन्तेहाँ ही नहीं"
-कृष्ण बिहारी 'नूर'
"चाहे सोने के फ्रेम में जड़ दो..
आईना झूठ बोलता ही नहीं"
-कृष्ण बिहारी 'नूर'
"अपनी रचनाओं में वो ज़िंदा है..
'नूर' संसार से गया ही नहीं"
-कृष्ण बिहारी 'नूर'