Dipti Misra Shayari
दीप्ती मिश्रा शायरी
"वो एक रात.. मुझे नींद जिसमे आ जाती..
तमाम उम्र उसी शब का इंतज़ार किया "
-दीप्ती मिश्रा
"वो एक दर्द जो मेरा भी है तुम्हारा भी..
वही सज़ा है.. मगर है वही सहारा भी "
-दीप्ती मिश्रा
"तेरे बगैर कोई पल गुज़र नहीं पाता..
तेरे बगैर ही एक उम्र को गुज़ारा भी "
-दीप्ती मिश्रा
"तुम्हारे साथ कभी जिसने बेवफाई की..
किसी तरह ना हुआ फिर ये दिल हमारा भी "
-दीप्ती मिश्रा
"तेरे सिवाह ना मुझसे कोई जीत पाया था..
तुझी से मात मिली है मुझे दुबारा भी "
-दीप्ती मिश्रा
दीप्ती मिश्रा नज़्म
"दुखती रग पर ऊँगली रख कर.. पूछ रहे हो कैसी हो..
तुमसे ये उम्मीद नहीं थी.. दुनिया चाहे जैसी हो..
एक तरफ मैं बिलकुल तन्हा.. एक तरफ दुनिया सारी..
अब तो जंग छिड़ेगी खुलकर.. ऐसी हो या वैसी हो..
जलते रहना चलते रहना तो उसकी मजबूरी है..
सूरज ने ये कब चाहा था उसकी किस्मत ऐसी हो..
मुझको पार लगाने वाले जाओ तुम तो पार लगो..
मैं तुमको भी ले डूबूंगी कश्ती चाहे जैसी हो..
ऊपर वाले अपनी जन्नत और किसी को दे देना..
मैं अपने दोज़ख़ में खुश हूँ जन्नत चाहे जैसी हो ..
दुखती रग पर ऊँगली रख कर पूछ रहे हो कैसी हो..
तुमसे ये उम्मीद नहीं थी दुनिया चाहे जैसी हो "
-दीप्ती मिश्रा