Parveen Shakir Shayari
“वक़्त से कोई शिकायत है ना अफ़लाक से है..
यही क्या कम है की निस्बत मुझे इस खाक़ से है”
-परवीन शाक़िर
"बज़्म -ऐ-अंजुम में क़बा ख़ाक की पहनी मैंने..
और मेरी सारी फ़ज़ीलत इसी पोशाक से है"
"इतनी रोशन है तेरी सुभ की दिल कहता है..
ये उजाला तो किसी दी-दये-नम्नाक से है"
-परवीन शाक़िर
"तेरी खुशबू का पता करती है..
मुझपे ऐहसान हवा करती है"
-परवीन शाक़िर
"अब्र बरसें तो इनायात उसकी..
शाख तो सिर्फ दुआ करती है"
-परवीन शाक़िर
"दिल को उस राह पे चलना ही नहीं..
जो मुझे तुझसे जुदा करती है"
-परवीन शाक़िर
"ज़िन्दगी मेरी थी लेकिन अब तो
तेरे कहने में रहा करती है"
"उसने देखा ही नहीं वरना ये आँख..
दिल का एहवाल कहा करती है"
-परवीन शाक़िर
"शाम पड़ते ही किसी शख्स की याद..
कूच-ए-जान में सदा करती है"
-परवीन शाक़िर
"मसला जब भी चरागों का उठा..
फैसला सिर्फ हवा करती है"
-परवीन शाक़िर
"कु-ब-कु फ़ैल गयी बात शनासाई की..
उसने खुशबु की तरह मेरी पज़ीराई की"
-परवीन शाक़िर
"वो कही भी गया लौटा तो मेरे पास आया..
बस यही बात है अच्छी मेरे हरजाई की"
-परवीन शाक़िर
"कैसे कह दूँ की मुझे छोड़ दिया है उसने..
बात तो सच है मगर बात है रुसवाई की"
-परवीन शाक़िर
"बादबाँ खुलने से पहले का इशारा देखना..
मैं समन्दर देखती हूँ तुम किनारा देखना"
-परवीन शाक़िर
"यूँ बिछड़ना भी बहुत आसान ना था उससे मगर..
जाते -जाते उसका वो मुड़ कर दोबारा देखना"
-परवीन शाक़िर
"आईने की आँख ही कुछ कम ना थी मेरे लिए..
जाने अब क्या -क्या दिखायेगा तुम्हारा देखना"
-परवीन शाक़िर
"कुछ फैसला तो हो की किधर जाना चाहिए..
पानी को अब तो सर से गुज़र जाना चाहिए"
-परवीन शाक़िर
"क्या चल सकेंगे जिनका फ़क़त मसला ये है..
जाने से पहले रख्त-ए -सफर जाना चाहिए"
-परवीन शाक़िर
"तोहमत लगा के माँ पे जो दुश्मन से दाद ले..
ऐसे सुख़न-फ़रोश को मर जाना चाहिए"
-परवीन शाक़िर